Self-Confidence and Self-Reliant : बच्चों में आत्मविश्वास कैसे बढ़ेगा और कैसे बनेंगे आत्मनिर्भर

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Wikiluv की वेबसाइड पर आपका फिर से स्वागत है। आज के इस लेख में हम आप सभी के लिए बच्चों से जुड़ा हुआ ऐसा लेख हैं बहुत से माता पिता की परेशानी और दिक्कतों को दूर कर देगा क्योंकि यह लेख “बच्चों में आत्मविश्वास कैसे बढ़ेगा और कैसे बनेंगे आत्मनिर्भर” (How to increase self-confidence in children and how to become self-reliant) के लिए लिखा गया हैं। अक्सर बच्चों के बढ़े होने के साथ-साथ माता -पिता परेशान होने लगते हैं, कि अभी तक उनके बच्चे को कुछ भी नहीं आ रहा हैं मेरे बच्चे में आत्मविश्वास कैसे बढ़ेगा और कैसे बनेगा वह आत्मनिर्भर। इस बात को लेकिन माता-पिता अधिक तनाव व क्रोध करने लगते हैं अपने बच्चे के ऊपर गुस्सा दिखाते हुए मारने पीटने लगते हैं जो कि बिल्कुल भी ग़लत हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपका बच्चा ज़िम्मेदार बनें तो आप अपने , बच्चों में उम्र के अनुसार छोटे-मोटे काम करने की आदत डालें, इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आत्मनिर्भर बनेंगे।

बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने के उपाय

  • ज़िम्मेदारी इंसान को भूल करने से बचने का विश्वास और रास्ता देती है। इसीलिए कहा जाता है कि बच्चों में छोटेपन से ही छोटे-मोटे काम करने की आदत बनाना ज़रूरी है।
  • आत्मविश्वास बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें उम्र के अनुसार ज़िम्मेदारियां सौंपें।
  • उम्र बढ़ने के साथ-साथ उनकी ज़िम्मेदारियां बढ़ाते जाएं।
  • लड़का या लड़की का भेदभाव करके नही।उम्र देखकर काम सौंपे।
  • काम की इच्छाशक्ति बढ़ाने के लिए अपने दोनों बच्चों के बीच एक तरह का कॉम्पिटिशन रखें और जीतने वाले को अपनी इच्छानुसार या बच्चों की पसंद अनुसार गिफ्ट रखें। इस तरह के कॉम्पिटिशन में किसी एक को हार या दूसरे को जीत के लिए उपहार मत दें बल्कि अपने दोनों बच्चों के बीच 1st और 2nd के लिए उपहार रखें।
  • यदि आपका एक ही बच्चा हैं तब भी आप यह प्रक्रिया अपना सकते हैं मगर आप इसमें अपने बच्चे के लिए एक बड़ा और एक छोटा उपहार रखें उसके कार्य करने के ढंग से जो आपको सही लगें वही उपहार देना चाहिए।
  • सही ढंग से काम न करने पर आप अपने बच्चों की तुलना किसी भी दूसरे बच्चे से मत करिए ऐसा करने से बच्चों के मन में ईर्ष्या व द्वेष की भावनाओं का समावेश होने लगता हैं। यदि आपके दो बच्चे हैं तब भी आप एक की तुलना दूसरे से मत करिए ऐसा करने से उनके बीच नफरत, झगड़ा व ईर्ष्या की भावना पनप सकती हैं।
  • यदि आप चाहते हैं कि आपका बच्चों में जल्दी आत्मनिर्भर और आत्मविश्वास बढ़े तो इसके लिए अपने जो कार्य उसको दिया उसमें बीच-बीच में रोक-टोक न करें पहले उनका काम देखें फिर अच्छी तरह उदाहरण देते हुए समझाए इस तरह वह समझ भी जाएंगे और आपसे डरेंगे भी नही की मम्मी – पापा बाद में नहीं डांटेंगे या बीच में रोक-टोक करेंगे। और वह अपना काम जल्द ही सही ढंग से करना सीख जाएगा।

बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कैसे सिखाए उम्र के हिसाब से बच्चों को काम करना ?

2 से 3 साल की उम्र में

बच्चों को छोटी-छोटी चीज़े संभालना सिखाएं। उदाहरण के तौर पर बिखरे हुए खिलौने उठाना और सहेजना सिखाएं। घर का सामान या उनके खिलौने जहां से उठाएं वहीं रखना सिखाएं। पशु और पक्षियों की देखभाल और उन्हें भोजन खिलाना सिखाएं। अगर घर में पालतू जानवर है तो उसकी देखभाल की छोटी-छोटी ज़िम्मेदारियां दें। किताबों या अख़बार की देखभाल करना या उनको शेल्फ में रखना भी बच्चों को ज़िम्मेदार बनाएगा।

3 से 5 साल की उम्र में

बच्चों को तीन साल की उम्र तक जो सिखा रहे हैं उसे जारी करते हुए नई ज़िम्मेदारियां जोड़ें। उन्हें पौधों को पानी डालने के लिए कहें। घर के छोटे-छोटे कार्य जैसे डायनिंग टेबल पर सामान लगाना, सफ़ाई करना, बड़ों के साथ कपड़ों और घर की सफ़ाई कराना आदि। इसके अलावा इस उम्र में उन्हें ख़ुद नहाने दें। साथ ही कपड़ों का चुनाव करने दें और तैयार होने दें। बच्चे स्वयं की ज़िम्मेदारी उठाना इसी उम्र में अच्छी तरह सीख पाते हैं।

5 से 7 साल की उम्र में

बच्चों में 3 साल से लेकर 7 साल तक की आदतें जारी रखने के साथ ज़िम्मेदारियां बढ़ाएं। उन्हें बिस्तर लगाना, अपनी किताबों और कॉपियों को सही ढंग से रखना और घर की साफ़ सफ़ाई भी सिखाएं। उन्हें ये ज़िम्मेदारियां अकेले निभाने दें, लेकिन शुरुआत में कैसे करना है इसमें मदद कर सकते हैं। इस उम्र में बच्चे थोड़े समझदार हो जाते हैं इसलिए उन्हें घर का पता और फोन नंबर याद कराएं ताकि ज़रूरत पड़ने पर वह ख़ुद की मदद कर सकें।

8 साल से लेकर किशोरावस्था तक

तीन साल से लेकर सात साल की उम्र वाली ज़िम्मेदारियां बच्चों को अभी भी निभाने दें। साथ में नई ज़िम्मेदारियां सौंपें। मूलभूत कुकिंग और ख़ुद का टिफिन पैक करना सिखाएं। घर का कचरा कूड़ेदान में डालना और बाज़ार से सामान ख़रीदना सिखाएं। जब बच्चे किशोर अवस्था में आएं, तो उन्हें हफ्ते में एक बार खाना बनाने दें। इसके अलावा ख़ुद के कपड़े धोने दें और सुबह के वक़्त अलार्म लगाकर ख़ुद उठने की ज़िम्मेदारी दें।

बच्चे प्यार की मूरत होते हैं इसलिए उनको उनकी जिम्मेदारियां मार-पीटकर या क्रोध करकें नहीं बल्कि प्यार से समझाकर सिखाए। इससे वह जल्दी सीख भी जाएंगे और समझ भी जाएंगे। और आपको यदि हमारे यह लेख पसंद आए तो आप इसे लाइक और शेयर करना न भूले। धन्यवाद….

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